उद्यमिता का अपना ही रोमांच हैं | हरीश के लिए उद्यमिता, दीर्घावधि स्तीर्था हैं | इंडिया और भारत टुगेदर के मार्गशाला कार्यकर्म की योजना पिथौरागढ़ के युवाओं के व्यवसाय को ध्यान में रखते हुए की गयी थी | आज युवाओं के पास काफी सारी आकांक्षायें हैं | वे विभिन्न प्रकार के उद्यमिता के तरफ आकर्षित होते जा रहे है, परन्तु उनके पास सही जानकारी नहीं है  जिससे उद्यमिता में स्तीर्था बनाये रखना मुश्किल  है | हरीश कहते हैं , “ मुझे व्यापार करना था जिसमे दीर्घावधि स्तीर्था मिले |” लोगों ने उसे काफी बार बताया था कि किस तरह किसी कार्य में स्तीर्था न होने  से कितनी परेशानी आ सकती है | 

हरीश सिंह, हमारे प्रार्थमिक मार्गशाला संस्करण के छात्र बनने से पहले कई जगह काम कर चुके थे | पिथौरागढ़ आने से पूर्व वे चंडीगढ़, नागपुर, पुणे और सागर में रह चुके थे | अपने नए व्यापार – मसाले  बेचने से पहले काफी सारे तरीकों के जॉब किये थे | “में काफी सालों तक घर से दूर रहा, इसलिए वापस आना चाहता था |” लॉकडाउन के शुरू होने पर उन्होंने पिथौरागढ़ में रह कर अपने व्यापार को शुरू करने का मन बना लिया| उन्हें लगा कि यह अपने आस पास की आजीवीका के लिए भी एक अच्छा मौका है| आखिरकार, लॉकडाउन सभी के लिए काफी मुश्किल समय था | 

हरीश ने सेकंड हैंड गाडी के द्वारा टैक्सी बिज़नेस की शुरुआत की, पर कुछ ही समय बाद उन्हें लगा की ये सतत नहीं ठहरेगा | इस योजना के लिए काफी निवेश की आवश्यकता है और उनके पास इतने पैसे है नहीं न ही जानकारी की ये सब कैसे किया जाये | उन्होंने अपने परिवार से बात की और उनके आर्थिक समस्याओं को पहचाना भी | उनके पास काफी सारे विचार थे पर, पैसों की कमी होने के कारण ये सारे विचार कसी काम के थे नहीं | मार्घशाला में जुड़ने के वक़्त उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि ये किस तरह से उनके जीवन को बदल डालेंगे | 

 इंडिया और भारत टुगेदर का मार्गशाला कार्यक्रम युवाओं को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने और अपने भविष्य को संभालने में मदद करता है। खोजशाला कार्यक्रम, आईएबीटी की एक नई पहल, युवाओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम है जो उन्हें उनके लिए सही करियर विकल्प खोजने में सक्षम बनाकर अपने बारे में अधिक जानने में मदद करता है।

“में अब भी मार्गशाला के सभी लोगों  से जुड़ा हुआ हूँ, जसमीत सर काफी अचे सहायक हैं |” हरीश खुशी से कहते हैं, “ मेरे पास बहुत सरे विचार थे, पर पूर्वी मैडम के उद्यमिता के स्तर से मुझे काफी कुछ समझ आया |“ पूर्वी के स्तर में ये सिखाया गया कि किस तरह से लोग अपने उद्यमिता की शुरुरात घर बैठे र सकते है| मसलों के साथ व्यापार करना हरीश को सबसे अच्छा लगा |

“लोग यहाँ कच्चे माल के साथ, छोटे-छोटे व्यापार की शुरुआत कर देते हैं “, हरीश ने बताया | हरीश काफी दूर दूर तक अपने जिले के भीतर गए | उन्होनें बहुत सरे मसाले बनानेवालों से  बातें की और उनके अनुभव को जाना | साथ ही हरीश उनके काम करने की जगह पर भी गए और साड़ी जानकारी भी प्राप्त की | बस विचार काफी नहीं होता, अनुसंधान भी उतना ही ज़रूरी होता हैं | हरीश ने ३ लाख रुपये का सरकार से लोन लिया ताकि व्यापार में  सहयोग हो | 

गाओं के लोगों से हल्दी, धनिया, इत्यादि जैसे कच्चे माल मिल जाते थे| इससे उनको भी आर्थिक रूप से सहायता हो जाती हैं  |  हरीश अपने व्यापार को  और भी आगे बढ़ने चाहते हैं| “में और भी अन्य प्रोडक्ट्स को जोड़ना चाहता हूँ | “ पिथौरागढ़ में मसाले का उद्योग उतना फैला नही हैं | नए प्रोडक्ट्स और सही पैकेजिंग से मसाले का व्यापर उन्मुख बना दिया जा सकता हैं | 

“फिलहाल मैं अकेले ही काम कर रहा हूँ |” हरीश की शादी हाल ही में हुई है | वे बताते हैं कि, “ मेरे परिवार में अधिकतर लोग फ़ौज में है या फ़ौज में शामिल होने की तैयारी कर रहें हैं | पर मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा |” हरीश के लिए उद्योग में ही रोमांच छुपा हुआ हैं | जिस समय सरकारी कार्य ही स्तिर माना जाता है, हरीश अपने व्यापार को स्थिर करने में लगे हुए हैं | “ मैं  अपने व्यापार से बहुत खुश हूँ”, हरीश कहते हैं, “कुछ ही महीनों में मुझे अच्छा प्रॉफिट भी देखने को मिला |”   

यदि हरीश की कहानी ने आपको भी उत्तराखंड में रहते हुए एक उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया, तो आज ही मार्गशाला से जुड़ें!
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